
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हाल ही में एक विवाद के केंद्र में हैं, जहां एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगान के समय उनके व्यवहार पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस घटना ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है, विशेषकर विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) द्वारा की गई तीखी प्रतिक्रियाओं के कारण।
घटना का विवरण:
एक सार्वजनिक कार्यक्रम में, जब राष्ट्रगान बज रहा था, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने प्रधान सचिव दीपक कुमार से बातचीत करते और सामने खड़े लोगों का अभिवादन करते नजर आए। वीडियो फुटेज में दिखता है कि दीपक कुमार ने उन्हें सावधान मुद्रा में खड़े रहने का इशारा किया, लेकिन मुख्यमंत्री ने बातचीत जारी रखी।
विपक्ष की प्रतिक्रिया:
इस घटना के बाद, राजद ने मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला। राजद नेता तेजस्वी यादव ने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि इससे बिहार की छवि धूमिल हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने नीतीश कुमार की मानसिक स्थिरता पर सवाल उठाते हुए सुझाव दिया कि यदि वे सक्षम नहीं हैं, तो अपने पुत्र निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बना दें।
कानूनी पहलू:
भारत में राष्ट्रगान का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। राष्ट्रगान के दौरान सावधान मुद्रा में खड़ा होना और बातचीत से बचना आवश्यक है। राष्ट्रगान का अपमान करने पर राष्ट्रगान अपमान अधिनियम, 1971 के तहत तीन साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
निष्कर्ष:
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इस घटना ने राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। एक सार्वजनिक पद पर आसीन व्यक्ति से अपेक्षा की जाती है कि वे राष्ट्रगान जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर अनुकरणीय व्यवहार प्रदर्शित करें। यह घटना न केवल व्यक्तिगत आचरण पर बल्कि सार्वजनिक पदों पर आसीन व्यक्तियों की जिम्मेदारियों पर भी प्रकाश डालती है।